एक सवाल अगर सौ लोगो से एक साथ ये सवाल किया जाये किया जाए कि आपको सिर्फ एक मिनट में अपनी ज़िन्दगी के सबसे जरूरी दस लक्ष्य बताने है, जो आप हर सूरत में पाना चाहते है..

तो मुझे नहीं लगता कि एक दो के अलावा कोई बता पायेगा,

और लोगों की सबसे बड़ी समस्या यही है कि वे दुनिया को, किस्मत को, भगवान को, दोष देते रहते है मगर खुद क्या कमियां कर रहे है उसका उन्हें अंदाज़ा तक नही रहता,

कैसे लिखे ?

लक्ष्य लिखने की इम्पॉर्टेन्स तब पता चलेगी जब आप इस तरह से अपने लक्ष्य को लिखेंगे।।

1. अपने दस ऐसे सपनो को लिखो जिन्हे आप सचमुच में पाना चाहते हो या पाना चाहते थे..

2. जैसे मैं गाडी चाहता हूँ, एक घर चाहता हूँ, १ लाख रूपये महीना या इससे अधिक या कम कमाना चाहता हूँ, गाडी कौन सी घर कैसा ये सब आपको लिखना है..

3. अब अपने लक्ष्य लिखने के बाद कम से कम २० पॉइंट लिखे कि अगर मेरे यह सपने पुरे न हुए तो मेरी ज़िन्दगी किस तरह की होगी,

खूब सोच समझ कर हर पहलू पर लिखे, जैसे – औसत ज़िन्दगी चलती रहेगी, पत्नी, बच्चे, माँ बाप सब के सपने अधूरे रह जायेंगे, मेरी जो इज्जत मेरे रिश्तेदारो में होनी चाहिए वह नही होगी, किसी दोस्त, रिश्तेदार के यहाँ किसी पार्टी वगेरह में जाऊ न जाऊ उन्हें कोई ज्यादा फर्क नही पड़ेगा, बच्चे औसत पढ़ पाएंगे, ज़िन्दगी भर मुझे कष्टो और दुखो का सामना करना पड़ेगा।। ऐसी ऐसी सभी बाते लिखो, दोस्तों और रिश्तेदारो और पड़ोसियों दे नाम ले लेकर लिखो की दीपक ये कहेगा, राहुल मुझपर हसेगा, बुआ ये कहेगी की हमे तो पता ही था की ये कुछ नही कर पायेगा, वगेरह वगेरह , सब कुछ लिख डालो आज , पूरी ईमानदारी के साथ

4. सिर्फ नेगेटिव ही नहीं अब पॉजिटिव बाते भी लिखनी है, कम से कम ३० पॉइंट लिखो, लिखो कि जब खुद की गाडी चलाऊंगा तो मुझे कैसा फील होगा, मेरी पत्नी बच्चो और परिवार को कैसा फील होगा, लिखो की जब नया घर लोगे तो कैसा लगेगा, लिखो कि जब हर दूसरे तीसरे महीने अपने घर पर कोई न कोई पार्टी रखा करोगे और सबको बुलाया करोगे तो कैसा फील होगा, लिखो तब दीपक क्या कहेगा,राहुल और बुआ क्या कहेगी, लिखो कि सबका व्यवहार तुम्हारे साथ कैसा होगा ? लिख डालो सबकुछ ईमानदारी से….

क्या होगा अब ये सब लिखने से ?

1. आपको पहली बार इस बात का एहसास होगा कि आपको आपके लक्ष्य प्राप्त करने कितने जरूरी है , और इनके बिना आपकी ज़िन्दगी कितनी बदतर हो सकती है, और अगर लक्ष्य पुरे हो गए तो ज़िन्दगी कितनी हसीन हो सकती है….

2. दूसरी सबसे जरूरी बात ये है की प्रकृति आपके विचारो के अनुरूप ही प्रतिक्रिया करती है, आप उसे भगवान कहो, गॉड कहो, अल्लाह कहो, प्रकृति की असीम शक्ति कहो या फिर माइंड पावर।।

मगर यह आपके विचारो के हिसाब से ही काम करती है, और आपके लिए हैरानी वाली बात तो यह है कि प्रकृति को आज तक पता ही नही कि आखिर आपको चाहिए क्या?

और जब आप अपने लक्ष्यों को लिख लेते है और रोज उन्हें पढ़ते है और उन्हें पाने के रस्ते ढूंढ़ते है उन पर काम करते है तो प्रकृति आपकी मदद करती है, आपका अवचेतन मन आपकी मदद करता है, आपका सहयोग करता है क्योंकि उसको भी पता चल गया है कि आपको चाहिए क्या ?

3. जब आप अपने लक्ष्य लिख लेते है तो वे आपके मानसिक पटल पर अंकित हो जाते है, वे आपके दिमाग में घूमते रहते है, आप उन्हें पाने की योजना बनाते रहते है, और आने वाले अवसर पर बारीकी से ध्यान देते है, समझ बढ़ जाती है, कार्य करने की स्पीड बढ़ जाती है. .

और ये सब इसलिए होता है क्योंकि आज तक तो आपने कभी सोचा ही नही था ये सभी सपने पुरे होने आखिर कितने जरूरी है, और लिखने से व् पढ़ने से वे दिमाग पर हावी हो जाते है, इसलिए हम पहले से ज्यादा सतर्क हो जाते है, तेज़ हो जाते है.

4. आगे बढ़ना है ज़िन्दगी में और दुसरो से पहले अपने सभी लक्ष्य पुरे करने है तो लक्ष्यों को लिखना ही पड़ेगा और उन्हें रोजाना पढ़ना भी पढ़ेगा, क्योंकि आज एक भी ऐसा कोई सफल व्यक्ति नहीं जिसने अपने लक्ष्य न लिखे हो और वह कंफ्यूज हो कि उसे क्या चाहिए और क्या नही, सभी सफल लोग अपने लक्ष्यों को लेकर बहुत ही क्लियर होते है, वह इतने क्लियर होते है कि या तो करो या मरो,

हमारी आदत खराब होती है


1.इंसान की फितरत है कि वो तब ही सबसे ज्यादा मेहनत करता है, सबसे ज्यादा फ़ोर्स के साथ काम करता है जब उसके पास कोई चारा ही नही रहता और उसे करना बहुत ही जरूरी हो जाता है, जैसे किसी का क़र्ज़ चुकाना है और बार बार क़र्ज़ चुकाने को उसे परेशान किया जा रहा है तब ही व्यक्ति बहुत ज्यादा काम करता है बिना खाने पीने सोने की परवाह किये।

ऐसे ही सपने तो हर व्यक्ति देखता है मगर उनको पाना या पूरा करना उसके लिए खास जरूरी नही होता, और मैंने पहले भी कहा की इंसान की फितरत है या तो वो बहुत मज़बूरी में काम करता है फिर बहुत ज्यादा प्रेरित होकर,

2.प्रेरित होकर व्यक्ति काम करता है जैसे – जब व्यक्ति किसी अपने जानने वाले को कोई लग्जरी कार चलाते हुए देखता है, या किसी अपने को कोई घर लेता हुआ देखता है या फिर किसी अपने का कोई सपना पूरा होता हुआ देखता है, किसी जॉब का या बिज़नेस का, अथवा किसी की पार्टी में शामिल होता है और वहां एक से एक बड़े लोगो से मिलता है तब वह प्रेरित होता है और तरह तरह के वादे करता है खुद से, और फिर कुछ दिनों बाद वो भूल जाता है कि उसने क्या वादा किया था और क्यों किया था ?आज शायद की किसी को याद हो कि ३ साल पहले किसी पार्टी में उसने खुद से ये वादा किया था कि अगली बार मैं भी खुद की गाडी से ही पार्टी में आऊंगा, यही होती है इंसानी आदत, इंसानी फितरत।।

3. इसलिए मैं कहता हूँ लिखो, जो भी पाना है जो भी बनना है लिखो,

किस व्यक्ति ने तुम्हे कब नीचा दिखाया, और फिर तुमने खुद से क्या वादा किया उसे लिखो,

हर छोटी छोटी ख्वाहिश लिखो, बीवी की ख्वाहिश लिखो, बच्चो की ख्वाहिश लिखो, माँ बाप की ख्वाहिश लिखो, भाई बहनो समाज की ख्वाहिश लिखो, लिखो कि तुम इन सब ख्वाहिशो को पूरा करने के लिए क्या कर सकते हो? लिखो,लिखो बस लिखो


सबसे इम्पोर्टेन्ट लिखना है, रास्ता होना नही है, रास्ता आपके पास हो या न हो, जब रास्ता होगा तब रास्ता भी लिखना, फ़िलहाल सपने है तो सपने लिखो, रास्ता हमेशा तब आता है जब मंजिल होती है तो पहले मंज़िल लिखो, रास्ता भी आएगा, रास्ता लाने के लिए ही सपने लिखवा रहा हूँ. ये करो फिर देखना ज़िन्दगी को एक नयी दिशा मिलेगी, आज ही

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