न्यूयॉर्क। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने टेलीपैथी के जरिए दूसरों के दिमागों को पढ़ लेने की कपोल कल्पना को हकीकत में बदलते हुए दुनिया के दो अलग-अलग देशों में बैठे चूहों के मस्तिष्कों को इंटरनेट के माध्यम से एक-दूसरे के साथ जोड़ने में कामयाबी हासिल की है।

साइटिफिक रिपोर्टस जर्नल में प्रकाशित हुए शोधपत्र में ड्यूक विश्वविद्यालय के न्यूरोबायोलाजिस्ट मिगुयेल निकोलेलिस ने बताया कि इसके तहत Brazilके एक चूहे के दिमाग को Internet की मदद से अमेरिका में रहने वाले चूहों के साथ जोड़ दिया गया।

टेलीपैथी उस प्रक्रिया को कहा जाता है जिसके जरिए बिना किसी भौतिक माध्यम की सहायता के एक इंसान दूसरे व्यक्ति के Mind को पढ़ने अथवा उसे अपने विचारों से अवगत कराने में कामयाब होता है।

इसके जरिए वैज्ञानिकों ने बाल की मोटाई के सौवें हिस्से जितने बारीक सेंसर को चूहों के मस्तिष्क में फिट कर दिया और उन्हें इंटरनेट के माध्यम से एक-दूसरे से जोड़ दिया। इस तरह से ब्राजील में रहने वाले चूहे को जैसे ही लाल रंग की एक बत्ती जलती दिखाई दी तो उसने एक लीवर दबाया और उसे पीने का पानी उपलब्ध हो गया।

उसकी इस कामयाबी के संकेत दूसरे चूहों तक भी इस इलेक्ट्रानिक टेलीपैथी के जरिए पहुंच गए और प्रोफेसर निकोलिस को इस शोध के लिए अमेरिकी रक्षामंत्रालय की डिफेंस एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्टस एजेसी (डारपा) से 2.6 करोड डॉलर की आर्थिक सहायता भी प्राप्त हुई है। इसी एजेंसी को ही इंटरनेट की खोज करने का श्रेय प्राप्त है।

ब्रेन मशीन इंटरफेस कहलाने वाली इस तकनीक के जरिए ही अपंग और लकवाग्रस्त लोग रोबोटिक बांह और कम्प्यूटर के कर्सर को हिला पाते हैं। इसके मस्तिष्क के संकेत भेजने के क्रम को सुधार कर रोगी के खुद के अंगों को भी क्रियाशील बनाया जा सकता है।

निकोलिस ने हालांकि अपनी इस तकनीक को एक ‘आर्गेनिक कम्प्यूटर’ करार देते हुए कहा है कि इसके जरिए दुनिया के कई मस्तिष्कों को जोड़कर एक ऐसा जैविक कम्प्यूटर तैयार हो जाता है जो उन समस्याओं को भी चुटकियों में हल कर सकता है जिन्हें एक मस्तिष्क हल कर पाने में संभव नहीं है। निकोलिस अब चूहों के ऊपर मिली कामयाबी से उत्साहित होकर बंदरों के ऊपर यह शोध करने जा रहे हैं।

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