Mid ब्रेन एक्टिवेशन पर मेरे अपने अनुभव-
काफी जोर शोर से चर्चा चल रही थी मिड ब्रेन एक्टिवेशन के बारे में, कि 5 ले 15 साल के बच्चों को कोई म्यूजिकल फ्रीक्वेंसी के बीच रखकर उनके ब्रेन को इस लेवल पर एक्टिवेट कर दिया जाता है की वे आँखे बंद करके भी देखने लग जाते है,

मैं काफी समय से ब्रेन पावर के विषय को लोगो में बाँट रहा था, उनको रियल सुपर ह्यूमन के बारे में बता रहा था, यानि मैं ब्रेन पावर में बिलीव करता था मगर फिर भी जब पहली बार ऐसी तकनीक के बारे में सुना तो मुझे बहुत हैरानी हुई, क्योंकि आज तक मुझे पता था कि अगर ब्रेन पावर को यूज़ करके कोई एक्स्ट्रा एबिलिटी प्राप्त करनी है तो उसके लिए बहुत सारे रूल्स फॉलो करने होंगे, बहुत मैडिटेशन – योग – प्राणायाम करना होगा और ये कई सालों की प्रक्रिया थी,

क्या हुआ जब मैंने बच्चों से मिलने का निर्णय लिया ?
मैंने ऑनलाइन काफी सर्च किया, मुझे कुछ और नयी चीजे जानने को मिली कि बच्चे सिर्फ आँख बंद करके ही नहीं देख पाते बल्कि उनके अंदर कुछ एक्स्ट्रा इम्प्रूवमेंट भी आते है और वह भी सिर्फ कुछ ही दिनों के अभ्यास से, जैसे – स्टडी इम्प्रूवमेंट, क्रिएटिवटी, पहले से ज्यादा तेज़, पहले से ज्यादा समझदार और कॉंफिडेंट |
मुझे हर चीज हैरान कर रही थी, हर चीज मेरे सिर के ऊपर से जा रही थी, पहले पहले लगा कि ये कुछ ठगी का तो कोई नया तरीका नहीं है? क्योंकि मैं मानता तो था कि ये सब संभव है, मगर इतनी जल्दी ???
लेकिन फिर मेरा कुछ बच्चों से सामना हुआ, यह इंडिया टीवी कि एक न्यूज़ थी, फिर ज़ी न्यूज़ पर भी देखा और फिर तो हज़ारो वीडियो को यूट्यूब पर देखा, और मैं देखकर दंग रह गया,
और अन्ततः मैंने ऐसे बच्चों से मिलने का निर्णय लिया,
और मैं फिर एक इंस्टिट्यूट पर पहुंच गया, वो बहुत ही सज्जन व्यक्ति थे और चेहरे पर एक तेज़ था, मैं ये नहीं कहता कि वो तेज़ किसी साधु संत वाला था, मगर वो तेज़ था उनके कॉन्फिडेंस का…

उनसे मेरी १ घंटे के तकरीबन बात चीत हुई, और उन्होंने मुझे पूरी तकनीक के बारे में समझाया, और जैसे ही मैंने इसको बारीकी से समझा मेरे सारे डाउट्स क्लियर हो गए, अब मैं सिर्फ उन बच्चों से मिलना चाहता था..

क्या हुआ जब मैं बच्चों से मिला ?
कुछ समय के इंतजार के बाद मुझसे 4 बच्चों की मुलाकात करवाई गई और ये कहकर कि आइए आपको दुनिया के सबसे अद्धभुत बच्चों से मिलवाते है…
पहला टेस्ट – मैं उन बच्चों से मिला उनकी उम्र लगभग 11 से 13 साल होगी, मुझे एक काली पट्टी दी गयी और मैंने उसको अच्छे से चेक करके बच्चों की आँखों पर बाँधा, फिर मैंने उन्हें अपना एटीएम और विजिटिंग कार्ड्स दिए, बच्चों ने मेरे सभी कार्ड्स किस रंग के है और इन पर क्या क्या लिखा है, सब कुछ सही सही बताया,
मुझे हैरानी भी हुई और डाउट भी, हैरानी तो होनी ही थी साथ ही डाउट भी होना स्वाभाविक था, क्योंकि ऐसा पहले कभी मैंने अपनी आँखों से नहीं देखता था… एकदम लाइव—-
दूसरा टेस्ट – मुझे लगा की बच्चे शायद पट्टियों के नीचे से कहीं से कुछ चीटिंग कर रहे है.. मैंने उनसे अपनी अपनी पट्टियाँ खोलने को कहा और मैंने अबकी बार उनकी आँखों पर दो बड़े बड़े कॉटन के टुकड़े रखकर फिर से पट्टियाँ बाँधी, दोबारा वही किया
अबकी बार सिर्फ २ बच्चे बता सके, बाकी २ बच्चे बता तो रहे थे मगर गलत बता रहे थे।
तीसरा टेस्ट – मुझे फिर डाउट हुआ कि शायद जो बच्चे नहीं बता पा रहे उनको पट्टिया अच्छे से बंध गई है और जो बता पा रहे है उनको पट्टिया बांधने में कोई गलती रह गई, फिर मैंने एक और टेस्ट लेने के बारे में सोचा, मैंने फिर से बच्चों की पट्टिया खुलवा दी , और उनकी आँखों को अपने हाथो से ढका, और अबकी बार तो और भी कमाल हो गया अबकी बार सिर्फ 1 ही बच्चा सही सही बता पाया।

क्या लगता है क्या मेरा डाउट क्लियर हुआ ? –
Exactly, मेरा डाउट क्लियर हुआ, अब मैं बाकी 3 बच्चों के बारे में सोच ही नहीं रहा था, मैं तो उस एक बच्चे को देखकर हैरान था जिसने सचमुच ये प्रूव कर दिया था कि वह वाकई इस दुनिया का सबसे अद्धभुत बच्चा है।
फिर मैंने इस बारे में जब उन ट्रेनर से बात की तो उन्होंने मुस्कुराकर जवाब दिया – कि कुछ बच्चे देर से सीखते है और कुछ बहुत जल्दी सीख जाते है , लेकिन ३ महीने की अवधि में सभी बच्चे ऐसा कर पाते है। और सच बताऊ तो मैं उनके जवाब से संतुष्ट भी था ।

अगला कदम मेरा क्या था ? –
कहानी बड़ी दिलचस्प होती जा रही थी क्योंकि अब मैं कुछ बच्चों को खुद एक्टिवेट करने के बारे में सोच रहा था।
और वहां से मैं वापिस घर आया एक अच्छी सी जगह देखकर मैंने कुछ बच्चों को बुलाया और जो ट्रेनिंग और जानकारी मैंने हासिल की थी, उसके बल पर मैंने कुछ बच्चों की क्लास लगाई।
और फर्स्ट टाइम मैंने भी कुछ बच्चों को सिर्फ दो दिन के अंदर उसी तरह से एक्टिवेट कर दिया।।
मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था क्योंकि अब वे सारे इम्प्रोव्मेंट्स जो मैंने टीवी न्यूज़ पर देखे थे वो सब अब मैं अपने बच्चों में देख रहा था. ..
और फिर उस दिन से लेकर आज तक मैं लगातार 300+ स्टूडेंट्स को खुद एक्टिवेट कर चुका हूँ, और मेरी टीम को भी शामिल कर लिया जाए तो यही संख्या आज हज़ारो में है।
मेरा धन्यवाद- मेरा उन लोगो को दिल से धन्यवाद है जिन्होंने इस तकनीक को विकसित किया, और उन लोगो को भी जिन्होंने मुझे इससे रूबरू कराया।।
बहुत बहुत धन्यवाद ।।।
ये कौन लोग थे और कहाँ से थे, ये मैं आप लोगो को अपनी अगली पोस्ट्स में शेयर करूंगा।।

क्या है मिड ब्रेन एक्टिवेशन और इसके क्या क्या फायदे है ? ये जानने के लिए एक लिंक पर जाए –

https://www.youtube.com/watch?v=IVwPjQhLZvs&t=21s